नकाबों के पीछे
छिपी हैं साज़िशें
हर रिश्ते के नीचे
दबी हैं ख्वाहिशें
वो जो रोशनी दिखाते हैं
अंधेरों के सौदागर हैं
वो जो वादे निभाते हैं
दरअसल गुनहगार हैं
तुम्हारी दुनिया का सच
मेरी नज़रों का झूठ है
तुम्हारे सपनों का रंग
मेरी रातों का धुंध है
पूछते हो कौन हूँ मैं?
दुनिया में झूठों को
आईना दिखाता हूँ,
चोर हूँ — नक़ाब चुराता हूँ।
—सिवा
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