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Saturday, August 15, 2026

नक़ाब चुराता हूँ

नकाबों के पीछे
छिपी हैं साज़िशें
हर रिश्ते के नीचे
दबी हैं ख्वाहिशें

वो जो रोशनी दिखाते हैं
अंधेरों के सौदागर हैं
वो जो वादे निभाते हैं
दरअसल गुनहगार हैं

तुम्हारी दुनिया का सच
मेरी नज़रों का झूठ है
तुम्हारे सपनों का रंग
मेरी रातों का धुंध है

पूछते हो कौन हूँ मैं?
दुनिया में झूठों को
आईना दिखाता हूँ,
चोर हूँ — नक़ाब चुराता हूँ।

—सिवा

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