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Friday, April 3, 2026

किराया

जन्म के बाद दादी ने कहा,
सब कुछ है तुम्हारे पास,
बस तुम्हें संभालना है।

 

गाँव से शहर,
शहर से बड़े शहर तक घुमाया गया,
पढ़ाया गया लिखाया गया —
और हर बार जताया गया।

 

दो भाइयों की निजी लड़ाई में,
कुछ बच्चे हमेशा पिसे,
माँ, चाची का प्यार मिला—
पर वो भी कहाँ अपने हिस्से का था।

 

आज शायद वो सफ़र खत्म हुआ,
घरवालों की चाल थी—जो भी हुआ

अपनी समझी थी ज़िंदगीनिकली उधार की,
एहसानों का कर्ज़ है—और मैं उसमें डूबा हुआ

 

अब किराया बकाया है उस ज़िंदगी का,
अब किराया बकाया है मेरे बचपन का
भरूँगा उम्र देकर।

-siva

 

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