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Wednesday, August 19, 2026

ख़ुदा-ए-मौत

ऐ ख़ुदा-ए-मौत तू मुझे ले क्यूँ नहीं लेता
ये रिहाई मुझे दे क्यूँ नहीं देता

अरे ऊब चुका हूँ रोज़ की तमाम बातों से
कि ख़्वाब तोड़ दिए सारे अपने ही हाथों से

ये मौत भी इनाम लगती है सज़ायाफ़्ता ज़िंदगी में
हर रात मरना और सुबह फिर उठ जाने से

कब तक जलाएगा मुझे यूँही धीमी आँच पे
ऐ ख़ुदा-ए-मौत, सज़ा-ए-मौत लिख दे नाम पे

— सिवा

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