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Thursday, October 22, 2026

आज कलम उठाई रुसवाई


आज कलम उठाई रुसवाई
सोच में पड़ गई तन्हाई
है उसका दिन की रिहाई

बेड़ियों में बँध गई
वो ख़्वाबों की प्याली
आज आई… वो हरजाई

दूर कहीं, पास भी
शोर में और भीड़ में
लाल धागे में गाँठ लगी
कटते-मरते रुक के देखा
गले पड़ गई…परछाईं

खींच के देखा, चिल्ला के सुना
कोई… आवाज़ न आई
आज कलम उठाई रुसवाई




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आज कलम उठाई रुसवाई

आज कलम उठाई रुसवाई सोच में पड़ गई तन्हाई है उसका दिन की रिहाई बेड़ियों में बँध गई वो ख़्वाबों की प्याली आज आई… वो हरजाई दूर कहीं, पास...