अपना दामन बचाने को
मेरा आँगन मैला करना—
गुरु ऐसे होते हैं क्या?
हूँगा मैं स्वार्थी, गोविंद,
ईर्ष्या से भरा-भया—
गुरु ऐसा कहते हैं क्या?
फ़र्ज़ था मेरा ख़िदमत करना,
जो - मैंने निभाया था।
उसी सेवा पे दोष लगाना—
गुरु ऐसा भी करते हैं क्या?
-siva
आज कलम उठाई रुसवाई सोच में पड़ गई तन्हाई है उसका दिन की रिहाई बेड़ियों में बँध गई वो ख़्वाबों की प्याली आज आई… वो हरजाई दूर कहीं, पास...
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